Search This Blog

Tuesday, 28 February 2017

रामपुरी वायलिन से गूंज रहे ‘मुहब्बत’ के तराने

वायलिन...नाम सुनते ही फिल्म मोहब्बतें का वह दृश्य सामने आ जाता है, जिसमें शाहरुख खान वायलिन बजा रहे होते हैं। जी हां, ये वायलिन अपने शहर में न सिर्फ बनते हैं बल्कि, देश और विदेशों की आवोहवा में संगीत की धुन घोलते हैं। ये कारोबार आज रामपुर शहर के कारखानों से निकलकर दूसरे देशों तक जा पहुंचा है। लेकिन, बात यहीं नहीं थमती। जिस तरह युवाओं पर वायलिन का जादू चढ़ा है, उससे इस कारोबार में और भी संभावनाएं हैं। देश ही नहीं विदेश तक धूम मचा रहे रामपुरी वायलिन के कारोबार से जुड़ी पेश है खास रिपोर्ट...!

 


ऐसे तैयार होता है वायलनि
एनजीएम म्युजिकल कंपनी के स्वामी ग्यासुद्दीन बताते हैं कि कश्मीर और हिमाचल से फर्र की लकड़ी, कोलकाता से गज बो, तार, खूंटी, प्ले पीस, फिंगर बोर्ड, एंड पिन और साउंड के लिए जर्मनी की मयपिलवुड से हम लोग  वायलिन तैयार कराते हैं। देश-विदेश में रामपुरी वायलिन के नाम से मशहूर इस कारोबार से शहर में करीब 250 लोग जुड़े हैं। लगभग दो सौ परिवारों की रोजी-रोजी का जरिया बने इस कारोबार को हमारी म्यूजिकल कंपनी समेत शहर की चार मुख्य म्यूजिकल कंपनियां बढ़ावा दे रही हैं। हालांकि, सरकार इसे विदेशी वाद्य यंत्र मानती है, इसलिए टैक्स के दायरे में रखा है। फिर भी यह कारोबार देश के प्रमुख शहरों के रास्तों से होता हुआ पड़ोसी मुल्कों में भी अपनी पहचान बनाए हुए है। टैक्स फ्री कराने के लिए कानूनी जंग लड़ी जा रही है। कमिश्नरी में वाद चल रहा है। सरकारी सहूलियतें मिलीं, टैक्स फ्री हुआ तो कारोबार में और भी उछाल आ जाएगा। फिल्मों में वायलिन दिखाए जाने से युवाओं का शौक वायलिन की ओर बढ़ा है। सो संभावनाएं अच्छी हैं।

सत्तर साल पुराना है इतिहास
रामपुरी वायलिन का इतिहास करीब सत्तर साल पुराना है। संगीत और काष्ठशिल्प के शौकीन अमीरुद्दीन और हसीनुद्दीन दोनों सगे भाइयों का हुनर रामपुर में वायलिन का जनक बना। दरअसल, अमीरुद्दीन एक बार बाजार गए, वहां जापान का बना हुआ वायलिन उन्हें पसंद आया। उन्होंने फुटपाथ पर लगे फड़ से इसे खरीद लिया और यहां अपने घर ले आए। एक दिन मचान से कोई सामान उतारते वक्त वायलिन नीचे गिरा और टूट गया, जिस पर उन्हें बड़ा दुख हुआ। उन्होंने काष्ठशिल्प में माहिर अपने भाई हसीनुद्दीन से कहा कि किसी भी तरह वह वायलिन बना दें। बस यहीं से रामपुरी वायलिन की शुरुआत हो गई।

मुहब्बते फिल्म ने जगाई ललक
वायलिन कारोबार करीब 13-14 साल पहले मुहब्बतें फिल्म की रिलीजिंग से उछला। इस फिल्म में शाहरुख खान को वायलिन बजाते हुए दिखाया गया है। तब से युवाआें में वायलिन सीखने की दिलचस्पी पैदा हो गई। इसके चलते यहां के वायलिन की मांग तेजी से बढ़ती गई। आज भी वायलिन वाद्य यंत्रों के शौकीन युवाआें में अपनी पकड़ बनाए हुए हैं।

चाइनीज वायलिन से है मुकाबला
रामपुरी वायलिन का मुकाबला चाइनीज वायलिन से है। फिलवक्त में कम कीमत के बावजूद चायना मार्केट को यहां का वायलिन टक्कर दे रहा है। कारोबारी मोहम्मद जफर के मुताबिक पंद्रह-सोलह सौ रुपये में चाइनीज वायलिन आ जाता है जबकि, रामपुरी वायलिन की कीमत ज्यादा है। फिर भी यहां का वायलिन अधिक पसंद किया जाता है। शुरुआती दौर में करीब चार-पांच साला पहले चायना वायलिन ने टक्कर दी थी लेकिन, मौजूदा वक्त में रामपुरी वायलिन की डिमांड ज्यादा है।

यहां बनते हैं रामपुरी वायलिनसल्वाकिया म्यूजिकल्स, रामपुर
रागाज म्यूजिकल्स, रामपुर
धुन म्यूजिकल, कंपनी, रामपुर
एनजीएम म्यूजिकल्स, कंपनी, रामपुर

कोलकाता समेत कई शहरों से आता है कच्चा माल
रामपुरी वायलिन बनता भले ही अपने शहर में है। लेकिन, इसके लिए कच्चा माल कोलकाता समेत दूसरे कई शहरों से आता है। साउंड के लिए जो लकड़ी इस्तेमाल होती है, वह जर्मन की है। जो दिल्ली और गाजियाबाद से मंगवायी जाती है। इसके अलावा गज बो, तार, खूंटी, फिंगरबोर्ड, एंडपिन आदि कोलकाता से मंगवायी जाती हैं। जबकि, फर्र की लकड़ी हिमाचल और कश्मीर से खरीदी जाती है।

यहां-यहां होती है सप्लाई
कोलकाता, दिल्ली, तमिलनाडु और पंजाब। जबकि कोलकाता, तमिलनाडू, दिल्ली से श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफ्रीका को एक्सपोर्ट होता है।

हुनर बना रोजी का जरिया
हाथों का हुनर कभी बेकार नहीं जाता। जी हां, वायलिन बनाने वाले कारीगर भी यही मानते हैं। उनकी रोजी-रोटी का जरिया उनका हुनर बना हुआ है। शेप सेटिंग करने वाले कारीगर मोहम्मद फूल कुरैशी कहते हैं कि आधा घंटा में एक वायलिन की शेप तैयार कर देते हैं। 1500-2500 रुपये माहवार कमा लेते हैं। नेक तैयार करने वाले अजीज अहमद 25 साल से अपना हुनर दिखा रहे हैं। वह कहते हैं कि कारीगरी ही उनके परिवार की आय का स्रोत है।

फैक्ट फाइल-
-जिले में वायलिन कारीगर करीब 200
-कच्चा माल लाने-ले जाने के कमीशन एजेंट करीब 10
-शहर में वायलिन निर्माता कंपनियां चार
-मुख्य वायलिन कारोबारी 10-15
-कोलकाता, कश्मीर, हिमाचल से रॉ मेटेरियल
-ट्रांपैरेंट थिनर कलरफुल वायलिन की डिमांड ज्यादा
-एक वायलिन 900-1200 में बनकर तैयार
-मार्केट में कंपलीट वायलिन सेट की कीमत 2000-2500 रुपये
-देश में कोलकाता, पंजाब, तमिलनाडू और दिल्ली सप्लाई
-श्रीलंका, अफ्रीका, पाकिस्तान और बांग्लादेश तक कारोबार

रामपुर रजा लाइब्रेरी, यानी बेशकीमती पांडुलिपियों का खजाना



बदलते जमाने के साथ हाईटेक हुई रजा लाइब्रेरी
एशिया की दूसरे नंबर की लाइब्रेरी रजा लाइब्रेरी ने भी बदलते जमाने के साथ अपना कलेवर बदला है। बेशकीमती पाण्डुलिपियां अब आन लाइन होंगी। पाण्डुलिपियों को संरक्षित किया जा रहा है। फारसी में लिखी रामायण का हिन्दी में अनुवाद हो चुका है। नवाब हामिद अली खां ने 1905 में किला में इस लाइब्रेरी की शुरुआत की। आजादी के बाद नवाब रजा अली खां ने कुतुब खाना सरकारी से बेशकीमती किताबों और पाण्डुलिपियों को हामिद मंजिल में महफूज किया था।

लाइब्रेरी की धरोहर
उर्दू, हिंदी, फारसी, अरबी, संस्कृत, पश्तो और टर्की की किताबें हैं। पांडुलिपियां हैं।

यहां से आते हैं शोधार्थी
सऊदी अरब, लंदन, जर्मन, फ्रांस, अमेरिका, जापान, इटली, ईरान, यमन, कोलंबिया और अफ्रीका से।

फारसी में लिखी रामायण का हिंदी अनुवाद
फारसी में लिखी रामायण का अब हिन्दी में अनुवाद हो चुका है। सुंदर नक्काशी के साथ इस सचित्र हिंदी रामायण का विमोचन 2011 में हुआ। रामायण का फारसी से हिन्दी अनुवाद पूर्व विशेष कार्याधिकारी स्वर्गीय डा0 वकारूल हसन सिद्दीकी और पूर्व विशेष कार्याधिकारी प्रोफेसर शाह अब्दुस्सलाम ने किया था। यह रामायण वाल्मीकि द्वारा संस्कृत में रचित थी। इससे पहले इसका अनुवाद सुमेर चन्द्र ने फारसी जुबान में किया था। इसमें खास बात यह है कि रामायण का आगाज बिस्मिल्लाह हिर रहमान निर रहीमसे किया गया है।

भोजपत्र पर लिखी रामायण, मौला अली के हाथ का लिखा कुरान हैं बेशकीमती
रजा लाइब्रेरी के खजाने में भोजपत्र पर तेलगू व मलयालम में लिखी रामायण और सातवीं सदी में ऊंटकी खाल पर हजरत अली के हाथ से लिखा कुरान शरीफ बेशकीमती हैं। यहां आने वालों के लिए मुख्य आकर्षण हैं। इसके अलावा आठवीं सदी में जाफरो सादिक अलैहिस्सलाम के हाथ से लिखा कुरान मजीद, नवीं सदी में इमाम रजा के हाथ से लिखा कुरान और दसवीं सदी में इब्ने मुकला के हाथ से लिखा कुरान भी दर्शनीय है।

लाइब्रेरी पर हुआ डाक टिकट जारी
रामपुर। 19 जून 2011 को इस लाइब्रेरीकी ख्याति को डाक टिकट जारी होने पर एक और बुलन्दी मिली। भारत सरकार संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय डाक विभाग द्वारा रजा लाइब्रेरी स्मारक डाक टिकट का विमोचन 19 जून 2009 को महामहिम टी0वी0 राजेश्वर राज्यपाल उ0प्र0 ने राजभवन लखनऊ में किया था। इस मौके पर पूर्व विशेष कार्यधिकारी प्रो0 शाह अब्दुस्सलामऔर चीफ पोस्ट मास्टर जनरल उ0प्र0 नीलम श्रीवास्तव मौजूद थे।

पाण्डुलिपियों का संरक्षणदीमक या बारिश से भीगकर खराब हो चुकी किताबों को दुरुस्त करने के लिए रसायनों का प्रयोग करने का रास्ता अख्तियार किया गया है।

रजा लाइब्रेरीकी व्यवस्था देखता है बोर्ड
रजा लाइब्रेरी की तमाम व्यवस्था पर लाइब्रेरी बोर्ड की नजर रहती है। कोई भी कार्य करने से पहले बोर्डकी मंजूरी जरूरी होती है। लाइब्रेरी की तमाम व्यवस्था बोर्ड की निगरानी में रहती है। वर्तमान में बोर्ड के चेयरमैन राज्यपाल राम नाईक,राज्यपाल उत्तर प्रदेश  हैं। जबकि, बोर्ड में आठ नामित सदस्य हैं।

यह है खास-
-इंडो-यूरोप वास्तुकला का अदभुत नमूना है रजा लाइब्रेरी।
-फ्रांसीसी इंजीनियर मिस्टर डब्ल्यू0सी0राइट ने बनाया था इस इमारत का नक्शा।
-प्रत्येक माह अमेरिका, लंदन, सऊदी अरब,जापान, इटली, ईरान,यमन, कोलंबिया, अफ्रीका आदि मुल्कों से आते पन्द्रह से बीस शोधार्थी।
-मध्यकालीन पेंटिग का इतिहास जानने की रहती है ललक।

रामपुर की शराब से सजते हैं विदेशी मयखाने

विपिन कुमार शर्मा, रामपुर। भारत की बात छोड़िए, लंदन हो या हॉंगकांग, स्विटजरलैंड हो या अमेरिका..., यूरोप से लेकर गल्फ कंट्रीज तक रामपुर की शराब का सुरूर मयकशों के सिर चढ़कर बोलता है। विदेशी मयखाने रामपुर की शराब से सजाए जाते हैं। जिनकी बदौलत ढाई हजार करोड़ रुपये सालाना कंपनी का टर्नओवर है।
रेडिको खेतान की यूनिट रामपुर डिस्टलरी देश-विदेश में रामपुर का नाम रोशन कर रही है। कंपनी करीब पांच हजार लोगों को रोजगार मुहैया करा रही है। इसमें कमोवेश हर साल ही कुछ न कुछ आधुनिकीकरण पर काम होता रहता है। नतीजा यह है कि रामपुर और देश के दूसरे शहरों में डिस्टलरी के तीस बाटलिंग यूनिट हैं। देशी-विदेशी शराब के चालीस ब्रांड यहां तैयार किए जाते हैं। जो यूरोप, अफ्रीकन और गल्फ कंट्रीज के चालीस देशों में एक्सपोर्ट किए जाते हैं। कंपनी के कुछ ब्रांडों को क्वालिटी मेंटेंन करने में गोल्ड मैडल तक मिल चुका है। बीते दो सालों में कंपनी का टर्न ओवर में उछाल आया है। जिससे फिलवक्त में एक हजार करोड़ का राजस्व रेडिको द्वारा जमा किया जाता है। कंपनी की प्लानिंग है कि इस बार भी प्राफिट के अनुसार क्वालिटी मेंटेन और क्वांटिनी बढ़ाने में बड़ा निवेश किया जाएगा।


ये है रामपुर डिस्टलरी का इतिहास
वर्ष 1943 में जब रामपुर में नवाबी रियासत थी। तब रामपुर स्टेट में उद्योग को बढ़ावा देने के लिए ब्रिटिश कंपनी ने डिस्टलरी की स्थापना की थी। देश आजाद हुआ, रामपुर स्टेट का स्वतंत्र भारत में विलय हुआ। तब ब्रिटिश कंपनी ने इसे डालमिया ग्रुप को सेल कर दिया। उस वक्त सीमित संसाधन, उपकरणों का अभाव या मार्केट में बेहतर तालमेल का अभाव, वजह जो भी रही, डालमिया ग्रुप ने वर्ष 1975 में रेडिको खेतान ग्रुप को रामपुर डिस्टलरी बेच दी। तब से रेडिको के नाम से डिस्टलरी देशी और विदेशी शराब बना रही है। एल्कोहल के एक के एक बेहतरीन उत्पाद देश-विदेश में बेचे जा रहे हैं।

मैजिक मोमेंट मार्फिस को मिला गोल्ड मैडल
रामपुर डिस्टलरी में तैयार की गई मैजिक मोमेंट मार्फिस को क्वालिटी सेटिस्फकेशन पर गोल्ड मैडल मिल चुका है। यही अवार्ड दूसरे प्राडक्ट कांटेसा रम को भी मिल चुका है। कंटेसा की सप्लाई मिलिट्री के लिए भी की जाती है। कंपनी का मोटो क्वालिटी बेस प्राडक्टस मार्केट में लाना है। इस पर रिसर्च भी होती रहती है।


चालीस देशों तक फैला कारोबार
रेडिको खेतान यानी रामपुर डिस्टलरी का कारोबार विदेशों तक फैला हुआ है। एशिया, यूरोप, अफ्रकन और गल्फ कंट्रीज में यहां के प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट किए जाते हैं। रेडिको खेतान के डायरेक्टर आपरेशन केपी सिंह बताते हैं कि दुुनिया के चालीस देशों में यहां के ब्रांड एक्सपोर्ट किए जाते हैं।
पांच हजार करोड़ का टर्नओवर
रामपुर डिस्टलरी का टर्नओवर ढाई हजार करोड़ रुपयों का है। केपी सिंह बताते हैं कि कंपनी के देशी और विदेशी शराब के चालीस ब्रांड हैं। जिन्हें अपने देश के अलावा दूसरे देशों में भी बेचा जाता है। इससे सभी तरह का एक हजार करोड़ रुपये कर के रूप में राजस्व को जाता है। जबकि, कंपनी का वार्षिक टर्नओवर पांच हजार करोड़ रुपये है।


देशी शराब के ब्रांड
मस्तीह
विंडीज
झूम प्ले
मिस जलवा

विदेशी शराब के प्रमुख ब्रांड
मैजिक मोमेंट वोदका
वोदक इन ऑरेंज फ्लेवर
वोदका इन एपिल फ्लेवर
वोदका इन लैमन फ्लेवर
वोदका इन चोको
वोदका रसभरी
वोदका लैमन ग्रास जिंजर
8पीएम ह्विस्की
आफ्टर डार्क ह्विस्की
कांटेसा रम
मार्फिस बरांडी
रायल व्हाइट हॉल
क्राउन ह्विस्की


भारतीयों को मस्ती तो विदेशियों को लुभाती है वोदकाबेशक रामपुर डिस्टलरी के देशी और विदेशी करीब चालीस ब्रांड हैं। लेकिन, कुछ ब्रांड ही ऐसे हैं जिनकी मार्केट में अच्छी पकड़ है। कंपनी लोकल स्तर पर मस्ती की सप्लाई करती है। यहां देशी शराब पीने वालों को मस्ती का सुरूर चढ़ता है। लेकिन, विदेशों में वोदका की डिमांड ज्यादा है। यही वजह है कि विदेशियों की पसंद को ध्यान में रखते हुए वोदका को छह अलग-अलग फ्लेवर में तैयार किया जाता है।

एक नजर में
1943 में ब्रिटिश कंपनी द्वारा स्थापित
आजादी के बाद डालमिया ग्रुप को सेल
1975 में रेडिको खेतान ने खरीदा
रामपुर और देश के दूसरे शहरों में 30 बाटलिंग यूनिट
क्वालिटी बेस एल्कोहल एक्सपोर्टर
देशी-विदेशी शराब के चालीस ब्रांड निर्माता
यूरोप, अफ्रीकन, गल्फ कंट्रीज समेत 40 देशों में एक्सपोर्ट
करीब पांच हजार लोगों को रोजगार
पांच हजार करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर
एक हजार करोड़ रुपये राजस्व को लाभ

Sunday, 26 February 2017

रामपुर हाउंड: इसमें है चीते जैसी फुर्ती


रामपुर हाउंड, एक ऐसा नाम जिसने छोटे से जनपद रामपुर को विश्व पटल पर लाने में अहम भूमिका निभाई है। चीते जैसी फुर्ती वाला यह स्पेशल डॉग शिकार के शौकीनों की पहली पसंद बना हुआ है। डॉग रेस हो या फिर हंटिंग दोनों में अपना लोहा मनवा चुका रामपुर हाउंड की स्थिति यह है कि हजारों से शुरू हुई इसकी कीमत अब लाखों तक पहुंच चुकी है। बकायदा लंदन से यह ब्रीड पेटेंट है। ब्रिटिश हुकूमत में रामपुरी हाउंड सम्मान पा चुका है।

ऐसे तैयार हुई नस्ल
रामपुर हाउंड की यह संकर प्रजाति कई उच्च प्रजातियों के मिश्रण का परिणाम है। बंटी केनन (केसीआई रजिस्टर्ड) बताते हैं कि इसमें तजाकिस्तान, अफगानिस्तान, इंग्लैंड एवं देशी नस्ल कुत्ता की नस्ल मिश्रित है। इसे इसका लुक इसकी ताजी एवं अफगान नस्ल से मिला है। जबकि, रफ्तार इसे इसकी अंग्रेजी ग्रे-हाउंड से मिली है। अपने शिकार का पीछा करने में इसका कोई जवाब नहीं। जंगली सुअर जैसे खूंखार जानवरों का शिकार करने में इसका कोई मुकाबला नहीं कर सकता। गंभीर रूप से घायल हो जाने पर भी यह उसे नहीं छोड़ता। दरअसल रामपुर हाउंड को सुबह के शिकार के उद्देश्य से ब्रीड किया गया। यह चीते जैसी फुर्ती से अपने शिकार को गर्दन से पकड़ता है और उसे धराशायी कर देता है। हार्स रेस की तरह डॉग रेस भी होती है। शिकार के लिए भी इस्तेमाल होता है। लिहाजा, चीते की तरह तेजी से दौड़ सके और आसानी से अपने शिकार को दबोच सके। ऐसी दोनो खूबियों में माहिर है रामपुर हाउंड। यही वजह है कि न सिर्फ भारत बल्कि, पड़ोसी मुल्कों में भी रामपुर हाउंड की खासी डिमांड है। यहां यह ब्रीड तैयार तो होती है, डॉग ऊंची कीमत में बेचे भी जाते हैं।


ये है रामपुर हाउंड का इतिहास
रामपुर स्टेट के चौथे नवाब अहमद अली खान बहादुर ने एक ऐसी प्रजाति के विषय में विचार किया जो उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप हो। चूंकि, रामपुर उस समय चारो ओर से घने जंगलों से घिरा हुआ था। जिनमें तमाम तरह के खूंखार जंगली जानवरों का वास था, शिकार के उद्देश्य से ऐसी सहयोगी की दरकार थी जो किसीभी प्रकार के जंगली जानवरों से डटकर मुकाबला कर सके और उसे धराशायी करने में पूरी तरह सक्षम हो। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए 1794-1840 के मध्य ग्रे हाउंड से अफगान हाउंड और फिर ताजी हाउंड का क्रास कराने के बाद रामपुर हाउंड ईजाद हुआ। 1923 में साइरस नाम के रामपुर हाउंड ने शिकार में झंडे गाड़े। भारत में कुत्तों की दो ही स्पेशल ब्रीड तैयार की गईं जिसमें दक्षिण भारत की राज पलायन और रामपुर की रामपुर हाउंड शामिल है।


क्या है केसीआई
केनल क्लब आफ इंडिया को शार्ट फार्म में केसीआई कहते हैं। डॉग रेस या डॉग से जुड़े अन्य कंपटीशन में शामिल होने के लिए केसीआई से रजिस्ट्रेशन कराया जाता है। यहां से कुत्ते का बाकायदा नाम और सर्टीफिकेट जारी होते हैं। मूलत: ये लंदन की कंपनी का क्लब है, जिसका इंडिया में आफिस चेन्नई में है।


ये हैं केसीआई रजिस्टर्ड
-बंटी केनल
-आमिर केनल
 
 
यहां है रामपुर हाउंड की डिमांड
भारत में लखनऊ, बनारस, दक्षिण भारत के अलावा विदेश में पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सऊदी अरब आदि में खासी डिमांड है। यहां लोग गिफ्ट में भी रामपुर हाउंड दे देते हैं। भारत में 20-25 हजार रुपये से लेकर डेढ़-दो लाख रुपये तक रामपुर हाउंड की कीमत है।
 
 
अंग्रेजों ने सम्मानित किया था रामपुर हाउंड
सन 1857 के गदर से पूर्व अंग्रेजी शासन काल में कलकत्ता में हुई प्रदर्शनी में रामपुर स्टेट की बेमिसाल वस्तुओं के साथ ही रामपुर हाउंड को भी शामिल किया गया था। तब वहां अंग्रेजों ने रेस कराई थी, जिसमें रामपुर हाउंड विजेता रहा था। इस पर सम्मानित किया गया था।
 
 
क्या है खूबी
-लंबाई करीब डेढ़ फुट से लेकर सवा दो फुट तक होती है।
-लंबी टांगे और सीना पतला होता है।
-कान पीछे की ओर मुड़े होते हैं।
-इसके पंजों की पकड़ मजबूत होती है और नाखून शिकार के लिए खूंखार होते हैं।
-23 से 28 इंच तक ऊंचा होता है।
-इसका भार करीब 38-40 किलोग्राम तक होता है।
-इसकी मादा सवा फुट से लेकर दो फुट तक हो सकती है।
-मादा का भार 35-38 किलोग्राम तक होता है।
-चीते की तरह तेज दौड़ता है।
-शिकार को पकड़ने में माहिर है।
-इसकी रफ्तार करीब 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है।

Monday, 20 February 2017

अब आकाशवाणी से भी हो जाएगी ‘ग्रामोफोन की छुट्टी’


रामपुर। वो रिकार्डिंग टेप, टर्न टेबिल मशीन पर चढ़ा फीता और घरों में गूंजती ग्रामोफोन की आवाज। तेजी से बदलते दौर में ऐसी दबी कि अब आकाशवाणी से भी ग्रामोफोन की ‘छुट्टी’ हो जाएगी। जी हां, जल्द ही न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि, उत्तराखंड के भी सभी आकाशवाणी केंद्र हाईटेक होंगे। यूपी की राजधानी लखनऊ और रामपुर के आकाशवाणी केंद्रों का चयन प्रथम चरण के लिए किया गया है। जहां लाइब्रेरी के डिजिटलाइजेशन का काम जोरो पर चल रहा है।
देश ही नहीं दुनिया भर में संचार के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन हो रहे हैं। ऐसे में आकाशवाणी कैसे पीछे रह सकता है। वह भी अत्याधुनिकता का चोला पहनने के लिए बेताब है। दिल्ली, जालंधर जैसे बड़े सेंटर भले ही पहले ही हाईटेक कर दिए गए हों। लेकिन, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में आज भी रिकार्डिंग उतनी हाईटेक नहीं हो पाई है। इन केंद्रों पर टर्न टेबिल मशीन, टेप डेस्क, ग्रामोफोन से काम चलाया जा रहा है। लेकिन, जल्द ही ये आउट डेटेड हो चुके टेप और अन्य उपकरण आकाशवाणी से अलविदा कर दिए जाएंगे।
------------
ग्रामोफोन के बजाय अब डीएसएस बिखेरेगा जलवा
ग्रामोफोन के बजाय अब आकाशवाणी में डीएसीएस, यानी डिजिटल साउंड सिस्टम अपना जलवा बिखेरेगा। आकाशवाणी मुख्यालय के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश में लखनऊ और रामपुर के आकाशवाणी के केंद्रों का डिजिटलाइजेशन किया जा रहा है। पुराने टेप आदि को कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क में सेव कर उनसे सीडी तैयार की जा रही हैं। इन दोनों केंद्रों के बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अन्य केंद्रों की टेप लाइब्रेरी का डिजिटलाइजेशन कराया जाएगा।
-------------
ये केंद्र होंगे हाईटेक
रामपुर, नजीमाबाद, बरेली, लखनऊ, इलाहबाद, गोरखपुर, आगरा, ओबरा, झांसी, कानपुर, मथुरा, वाराणसी, फैजाबाद, अल्मोड़ा, पौड़ी
-------------
बदलते दौर में सबकुछ तेजी से बदल रहा है। ऐसे में ग्रामोफोन व टेप गुजरे जमाने की बात हो चली है। अब युग हाईटेक हो रहा है। ऐसे में न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि, उत्तराखंड के सभी पंद्रह केंद्रों को हाईटेक करने का मुख्यालय से आदेश आया था, जिसे फारवर्ड करते हुए काम शुरू करा दिया गया है।
-गुलाब  सिंह, अपर महानिदेशक, आकाशवाणी मध्य क्षेत्र
--------------
पहले चरण में रामपुर और लखनऊ के आकाशवाणी केंद्र को हाईटेक करने का आदेश मिला था। जिस पर हम लोगों ने काम शुरू कर दिया। ग्रामोफोन, पुराने टेप आदि सब हटाए जा रहे हैं। लाइब्रेरी व अन्य सिस्टम हाईटेक किया जा रहा है। करीब पचास फीसदी काम रामपुर आकाशवाणी पूरा कर चुका है।
-मंदीप कौर, कार्यक्रम प्रमुख, आकाशवाणी रामपुर

डीएम के खिलाफ सभी दल लामबंद, आयोग से मिले

 



किसी ने बताया सपा का एजेंट तो किसी ने जताई इनके रामपुर में रहने पर धांधली की आशंका

रामपुर। आईएएस अफसर अमित किशोर पहली ही पोस्टिंग में सभी राजनैतिक दलों का टारगेट बन गए हैं। डीएम के खिलाफ सभी दल लामबंद हो गए हैं। सोमवार को रामपुर के कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त से दिल्ली में मुलाकात की और डीएम पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें हटवाने की मांग की।
दरअसल, अमित किशोर रामपुर में बतौर मुख्य विकास अधिकारी आए थे। शासन ने उन्हें डीएम के पद पर पहली तैनाती भी रामपुर ही दे दी। अब जब चुनाव आए तो आयोग में शिकवा-शिकायत शुरू हो गईं। चुनाव से पहले डीएम को रामपुर से हटवाने के लिए न सिर्फ रामपुर बल्कि, प्रदेश मुख्यालय तक से नेताओं ने ताकत झोंक दी। लेकिन, डीएम को नहीं हटवा पाए। अब जब चुनाव सकुशल संपन्न हो गया। आगामी 11 मार्च को मतगणना होगी तो सभी दल डीएम के खिलाफ लामबंद हो गए हैं।
-----------

भाजपा
सोमवार को शहर विस सीट से भाजपा प्रत्याशी एवं पूर्व मंत्री शिव बहादुर सक्सेना के बेटे आकाश कुमार सक्सेना ने पूर्वाह्न 11 बजे सीईसी डा. नसीम जैदी से मिले और कहा कि आईएएस अफसर अमित किशोर बतौर सीडीओ रामपुर आए थे। आजम खां ने उन्हें यहां का डीएम बनवाया। तभी से उनकी आजम खां में आस्था बढ़ गई है। ऐसे में निष्पक्ष मतगणना नहीं हो सकती। चुनाव और मतगणना की निष्पक्षता के लिए डीएम रामपुर को यहां से हटवाया जाए।
---------------
कांग्रेस
कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष फैसल खां लाला ने पूर्वाह्न 11:30 बजे मुख्य चुनाव आयुक्त से से मुलाकात की। ज्ञापन सौंपा, जिसमें कहा है कि पूर्व में भी वह डीएम रामपुर की शिकायत कर चुके हैं लेकिन, कार्रवाई नहीं हुई। जिससे डीएम अब उनसे रंजिश रखने लगते हैं। चुनाव वाले दिन मतदान से उन्हें रोका गया और थाने में बंद करवा दिया गया। इनके रामपुर में रहते निष्पक्ष मतगणना नहीं हो सकेगी।
----------
बसपा
बसपा प्रत्याशी डा. तनवीर अहमद पहले भी आयोग में शिकायत कर चुके हैं। सोमवार को दोपहर 12 बजे वह मुख्य चुनाव आयुक्त से मिले और ज्ञापन सौंपा। जिसमें मतगणना के दौरान गड़बड़ी की आशंका जताई और आरोप लगाया कि डीएम को यहां से हटाया जाए और मगतणना के लिए स्पेशल आब्जर्वर नियुक्त कर दिया जाए। आरोप लगाया कि डीएम कैबिनेट मंत्री आजम खां के बेहद करीबी हैं, इनका हटवा बहुत जरूरी है।
------------
सपा
समाजवादी पार्टी ने डीएम-एसपी को बसपा का एजेंट करार दे दिया है। कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खां चुनाव आयोग में पहले ही शिकायत कर चुके हैं। उन्हें यहां से हटवाने की मांग कर चुके हैं। चार दिन पहले  सपाई जिलाध्यक्ष अखलेश कुमार के नेतृत्व में मंडलायुक्त से मिले थे और यहां तक आरोप लगाया कि डीएम को हटवा दो, वर्ना ये आजम खां और अब्दुल्ला को चुनाव हरवा देंगे।
--------------------

-शिकायत करने के लिए कोई भी स्वतंत्र है। कोई भी आयोग में जा सकता है, वहां शिकायत कर सकता है। रही बात आरोपों की तो आरोप निराधार हैं। आयोग के दिशा-निर्देश और आदेशों का अक्षरशा: पालन किया जा रहा है। किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं बरता जा रहा है। जिला प्रशासन निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए प्रतिबद्ध है और करा रहा है।
-अमित किशोर, डीएम रामपुर

Saturday, 18 February 2017

सावधान! घर में रखे हैं ‘मौत के सामान’, बच्चों का रखें ध्यान

रामपुर। बेशक, टीबी, फ्रिज, कूलर, वाशिंग मशीन आज की जरूरत बन चुकी हैं। लेकिन, इनसे खतरा भी बहुत है। जरा सा केबिल शार्ट हुआ और फिर कुछ भी संभव है। ‘मौत के सामान’ बन चुके इन उपकरणों से बच्चों को दूर ही रखें तो बेहतर है। वर्ना.....जरा सी लापरवाही, जिंदगी भर के लिए गम दे सकती है। शाहबाद में रविवार को जो कुछ हुआ, सबक लेने के लिए काफी है।
------------------
क्या करें क्या न करें
-ध्यान रखें कि बच्चा बिजली का बोर्ड न छुए।
-बिजली के सर्किट खुले हुए न रखें।
-बच्चा उपकरणों को ऑन-आफ न करे।
-बोर्ड से बच्चा टीबी, फ्रिज, डीवीडी या अन्य उपकरणों की केबिल न लगाए और न ही निकाले।
-बिजली केबिल के प्लग भी बच्चों को न छूने दें।
-प्रेस से भी बच्चों को दूर रखें।
-मासूमों का स्वयं ख्याल रखें।
-बड़े बच्चों को भी जागरूक करते रहें।
-------------------
-वैसे तो कोई भी बिजली का उपकरण बनाते समय यह ध्यान रखा जाता है कि उसमें करेंट न फैले। बायर और बोर्ड में ही करेंट रहे। बाडी पर करेंट न उतरे। लेकिन, कई बार बायर शॉर्ट होने से या फिर उपकरण फुंकने से करेंट आ जाता है। ऐसे में अर्थ मिल जाए तो कुछ भी संभव है।
-सतीश कुमार शर्मा, इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर
--------------------
-फ्रिज, टीबी या अन्य जो भी बिजली के उपकरण हैं। आज की जरूरत हैं। हम उनसे दूर नहीं रह सकते और उनके बिना जीवन भी अधूरा है। लेकिन, यह हकीकत है कि जो वस्तु जितनी सुविधा जनक होती है, नुकसानदेय भी हो सकती है। लिहाजा, जागरूक रहें और बच्चों को प्लग लगाते वक्त ध्यान दें। सावधानी से काम करें।
-डा. इंदुभूषण महापात्र, समाजशास्त्री
--------------------
-करेंट लगने की स्थिति में फौरन स्विच आफ करें। ध्यान रखें कि बिजली उपकरणों के आसपास पानी न हो। पीड़ित को तत्काल कंबल में लपेट लें। पल्स चेक करें। पल्स कम हो तो उसे छाती पर कार्डिक मसाज दें। मुंह से गर्म भाप दें। छाती पंप करें और डाक्टर के पास ले जाएं।
-डा. विशेष कुमार, एमडी